ये कहानी की शुरुआत होती है ओड़िसा के एक जिले से जिसका नाम है रायगड़ा।रायगड़ा , ओड़िसा और आंध्रा के बॉर्डर पर है और चारो तरफ पहाड़ो से घिरा हुआ है।मैं झारखण्ड के एक शहर देवघर का रहने वाला हूँ। रायगड़ा के एक इंजिनीरिंग कॉलेज में पड़ने के लिए मैने ट्रैन पकड़ा और रायगड़ा पहुँच गया। मुझे कॉलेज छोड़ने मेरे साथ मेरे एक बड़े भैया भी आये हुए थे।स्टेशन से कॉलेज की दूरी लगभग 15km थी। उस समय कॉलेज जाने के लिए कमान्डर गाड़ी चलती थी जिसको पकड़कर हमलोग कॉलेज पहुच गए।होस्टल अलॉटमेंट के लिए मुझे होस्टल वार्डन के पास भेजा गया जिनका नाम जी सी दास था।मुझे ब्लॉक 1 के रूम न.23 सीट मिली। हमलोग रूम पहुचे और सो गए क्योंकि हम बहुत थक चुके थे। दो दिन बाद हमारा ओरिएंटेशन था। भैया दो दिन मेरे ही साथ रहे और ओरिएंटेशन प्रोग्राम के बाद वो भी घर चले गए। मेरे रूम में अभी तक कोई रूमपार्टनेर नही आया था। मैं दिनभर अपने ही रूम में रहता क्योंकि उस समय किसी से उतनी जान पहचान भी नही हुई थी। अगले दिन सब क्लास जाने के लिए तैयार हुए , मैं भी सबके साथ लाइन में लगकर होस्टल से कॉलेज जाने लगा क्योंकि सीनियर्स का उससमय बोलबाला था।खेर सब अपने अपने क्लासरूम पहुच चुके थे । टीचर आये और ििइन्ट्रो सेशंस शुरू हुए।इंट्रो सेशन से पता चला कि पूरे IT ब्रांच में जिसकी स्ट्रेंथ 60 थी में मैं झारखंड से तीन लड़के और एक लड़की बिहार से और दो लड़की असम की और एक लड़का बंगाल से था।
.......To be continue
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